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06 Aug
2022
August 6, 2022  comment(7)

रक्षाबंधन के दिन भद्राकाल होने पर राखी नहीं बांधी जाती है। भद्राकाल को अशुभ समय माना गया है। भद्राकाल में किसी भी तरह काशुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। रक्षाबंधन का त्योहार हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह सबसे…

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18 Jun
2022
June 18, 2022  comment(9)

अकसर लोगों के घरों में आपने सात दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर लगी हुई देखी होगी और आपके मन में यह सवाल जरूर उठा होगा किइस तस्वीर को लगाने के पीछे क्या कारण है. बता दें कि यह तस्वीर न केवल दिखने…

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25 May
2022
May 25, 2022  comment(3)

झाड़ू में धन की देवी महालक्ष्मी का वास पौराणिक शास्त्रों में कहा गया है कि जिस घर में झाड़ू का अपमान होता है वहां धन हानि होती है, क्योंकि झाड़ू में धन की देवी महालक्ष्मी का वास माना गया है। विद्वानों के अनुसार…

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26 Apr
2022
April 26, 2022  comment(3)

शुक्र ग्रह सौरमंडल का सबसे दैदीप्यमान ग्रह है। इसका वर्षमान हमारे 225 दिनों के समान है। 22 मील प्रति सेकंड की गति से सूर्य कीप्रदक्षिणा करता है। यह ग्रह दक्षिण–पूर्व दिशा का स्वामी, स्त्री जाति, श्याम, गौर वर्ण का है।  अत: इसके भाव से जातक का रंग गेंहुआ होता है। लग्न से छठे स्थान पर निष्फल व सातवें स्थान पर अशुभ होता है। मदन पीड़ा, गानवाहन आदि का कारक होता है। जातक की कुंडली में विभिन्न स्थितियों के अनुसार शुक्र ग्रह से सगाई, विवाह, संबंध विच्छेद, तलाक, विलास, प्रेम सुख, संगीत, चित्रकला, द्यूत, कोषाध्यक्षता, मानाध्यक्षता, विदेश गमन, स्नेह व मधुमेह प्रमेह आदि रोगों का अध्ययन होताहै। मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ लग्नों में यह योगकारक होता है। आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती, कृतिका व स्वाति और आर्द्रा नक्षत्रों मेंरहकर शुभ फल देता है तथा भरणी, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा नक्षत्रों में स्थित होकर शुभ फल प्रदान करता है। शेष पंद्रह नक्षत्रों में सम फल देता है। इस ग्रह का अधिकार  मनुष्य के चेहरे पर होता है। यह ग्रह एक राशि पर डेढ़ माह रहता है। यह वृष तथा तुला राशि का स्वामी है तथा तुला राशि पर  विशेष बली रहता है। शुक्र ग्रह के गुरु सूर्य, चंद्र मित्र, बुध, शनि सम तथा मंगल शत्रु होते हैं। जन्म के समय शुक्र ग्रह का द्वादश भावों में फल इस प्रकार होता है–   जिसके लग्न स्‍थान में शुक्र हो तो उसका अंग–प्रत्यंग सुंदर होता है। श्रेष्ठ रमणियों के साथ विहार करने को लालायित रहता है। ऐसाव्यक्ति दीर्घ आयु वाला, स्वस्थ, सुखी, मृदु एवं मधुभाषी, विद्वान, कामी तथा राजकार्य में दक्ष होता है।   दूसरे स्थान पर शुक्र हो तो जातक प्रियभाषी तथा बुद्धिमान होता है। स्त्री की कुंडली हो तो जातिका सर्वश्रेष्ठ सुंदरी पद प्राप्त करने कीअधिकारिणी होती है। जातक मिष्ठान्नभोगी, लोकप्रिय, जौहरी, कवि, दीर्घजीवी, साहसी व भाग्यवान होता है।   जातक की कुंडली में तीसरे भाव पर शुक्र हो तो वह स्त्री प्रेमी नहीं होता है। पुत्र लाभ होने पर भी संतुष्ट नहीं होता है। ऐसा व्यक्तिकृपण, आलसी, चित्रकार, विद्वान तथा यात्रा करने का शौकीन होता है।   चतुर्थ भाव पर यदि शुक्र हो तो जातक उच्च पद प्राप्त करता है। इस व्यक्ति के अनेक मित्र होते हैं। घर सभी वस्तुओं से पूर्ण रहता है।ऐसा व्यक्ति दीर्घायु, परोपकारी, आस्तिक, व्यवहारकुशल व दक्ष होता है।   पांचवें भाव पर पड़ा हुआ शुक्र शत्रुनाशक होता है। जातक के अल्प परिश्रम से कार्य सफल होते हैं। ऐसा व्यक्ति कवि हृदय, सुखी, भोगी, न्यायप्रिय, उदार व व्यवसायी होता है।   छठवां, शुक्र जातक के नित नए शत्रु पैदा करता है। मित्रों द्वारा इसका आचरण नष्ट होता है और गलत कार्यों में धन व्यय कर लेता है।ऐसा व्यक्ति स्त्री सुखहीन, दुराचार, बहुमूत्र रोगी, दुखी, गुप्त रोगी तथा मितव्ययी होता है।   आठवें स्थान में शुक्र हो तो जातक वाहनादि का पूर्ण सुख प्राप्त करता है। वह दीर्घजीवी व कटुभाषी होता है। इसके ऊपर कर्जा चढ़ारहता है। ऐसा जातक रोगी, क्रोधी, चिड़चिड़ा, दुखी, पर्यटनशील और पराई स्त्री पर धन व्यय करने वाला होता है।   यदि नौवें स्थान पर शुक्र हो तो जातक अत्यंत धनवान होता है। धर्मादि कार्यों में इसकी रुचि बहुत होती है। सगे भाइयों का सुख मिलताहै। ऐसा व्यक्ति आस्तिक, गुणी, प्रेमी, राजप्रेमी तथा मौजी स्वभाव का होता है।   जिसके दशम भाव में शुक्र हो तो वह व्यक्ति लोभी व कृपण स्वभाव का होता है। इसे संतान सुख का अभाव–सा रहता है। ऐसा व्यक्तिविलासी, धनवान, विजयी, हस्त कार्यों में रुचि लेने वाला एवं शक्की स्वभाव का होता है।   जिसकी जन्म कुंडली में ग्यारहवें स्थान पर शुक्र हो तो जातक प्रत्येक कार्य में लाभ प्राप्त करता है। सुंदर, सुशील, कीर्तिमान, सत्यप्रेमी, गुणवान, भाग्यवान, धनवान, वाहन सुखी, ऐश्वर्यवान, लोकप्रिय, कामी, जौहरी तथा पुत्र सुख भोगता हुआ ऐसा व्यक्ति जीवन मेंकीर्तिमान स्थापित करता है।   जिसके बारहवें भाव में शुक्र हो, तब जातक को द्रव्यादि की कमी नहीं रहती है। ऐसा व्यक्ति स्‍थूल, परस्त्रीरत, आलसी, गुणज्ञ, प्रेमी, मितव्ययी तथा शत्रुनाशक होता है। एवं शक्की स्वभाव का होता है।  

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26 Mar
2022
March 26, 2022  comment(2)

हर बीमारी का समबन्ध किसी न किसी ग्रह से है जो आपकी कुंडली में या तो कमजोर है या फिर दूसरे ग्रहों से बुरी तरह प्रभावित है। यदिस्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है तो आज धनवान कोई नहीं है। हर व्यक्ति के शरीर…

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11 Mar
2022
March 11, 2022  comment(2)

मेष राशि(Aries): राशि का स्वामी मंगल, बुध, सूर्य की संगति में है। कड़वाहट को मिठास में बदलने की कला आपको सीखनी पड़ेगी।जीवन साथी का सहयोग व सानिध्य प्राप्त होगा। पंचम भाव दूषित होने के कारण संतान पक्ष से निराशाजनक समाचार मिल सकता…

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24 Oct
2021
October 24, 2021  comment(3)

कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो कभी भी अपने शब्दों पर टिककर नहीं रहते। कुछ लोग अपने वादे को तोड़ देते हैं। कहा जाता है कि अपने वादेऔर शब्दों पर टिके रहने के लिए बहुत ही साहस और ताकत की जरूरत होती…

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12 Dec
2020
December 12, 2020  comment(249)

बच्चों के बड़े होने पर अक्सर उनके माता-पिता उनकी शादी के लिए चिंतित होते हैं कि उनके बच्चों की शादी कब होगी। विशेष तौर पर हिंदू धर्म में शादी को लेकर ज्योतिष, ग्रह और कुंडली का खासा महत्व है। कुण्डली में ग्रहों…

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19 Jul
2020
July 19, 2020  comment(37)

विवाह पूर्व कुंडली मिलान या गुण मिलान को अष्टकूट मिलान या मेलापक मिलान कहते हैं। इसमें लड़के और लड़की केजन्मकालीन ग्रहों तथा नक्षत्रों में परस्पर साम्यता, मित्रता तथा संबंध पर विचार किया जाता है। शास्त्रों में मेलापक के 2 भेद बताएगए हैं।…

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28 Jun
2020
June 28, 2020  comment(48)

राहु काल में क्या न करें: 1. इस काल में यज्ञ, पूजा, पाठ आदि नहीं करते हैं, क्योंकि यह फलित नहीं होते हैं। 2. इस काल में नए व्यवसाय का शुभारंभ भी नहीं करना चाहिए। 3. इस काल में किसी महत्वपूर्ण कार्य…

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