कुंडली में बैठा शुक्र आपको कैसे कर रहा है प्रभावित,

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26 Apr
2022

शुक्र ग्रह सौरमंडल का सबसे दैदीप्यमान ग्रह है। इसका वर्षमान हमारे 225 दिनों के समान है। 22 मील प्रति सेकंड की गति से सूर्य कीप्रदक्षिणा करता है। यह ग्रह दक्षिणपूर्व दिशा का स्वामीस्त्री जातिश्यामगौर वर्ण का है।

 अतइसके भाव से जातक का रंग गेंहुआ होता है। लग्न से छठे स्थान पर निष्फल  सातवें स्थान पर अशुभ होता है। मदन पीड़ागानवाहन आदि का कारक होता है। जातक की कुंडली में विभिन्न स्थितियों के अनुसार शुक्र ग्रह से सगाईविवाहसंबंध विच्छेदतलाकविलासप्रेम सुखसंगीतचित्रकलाद्यूतकोषाध्यक्षतामानाध्यक्षताविदेश गमनस्नेह  मधुमेह प्रमेह आदि रोगों का अध्ययन होताहै। मिथुनकन्यामकर और कुंभ लग्नों में यह योगकारक होता है। आश्लेषाज्येष्ठारेवतीकृतिका  स्वाति और आर्द्रा नक्षत्रों मेंरहकर शुभ फल देता है तथा भरणीपूर्वा फाल्गुनीपूर्वाषाढ़ामृगशिराचित्राधनिष्ठा नक्षत्रों में स्थित होकर शुभ फल प्रदान करता है।


शेष पंद्रह नक्षत्रों में सम फल देता है। इस ग्रह का अधिकार  मनुष्य के चेहरे पर होता है। यह ग्रह एक राशि पर डेढ़ माह रहता है। यह वृष तथा तुला राशि का स्वामी है तथा तुला राशि पर  विशेष बली रहता है। शुक्र ग्रह के गुरु सूर्यचंद्र मित्रबुधशनि सम तथा मंगल शत्रु होते हैं। जन्म के समय शुक्र ग्रह का द्वादश भावों में फल इस प्रकार होता है

 

जिसके लग्न स्‍थान में शुक्र हो तो उसका अंगप्रत्यंग सुंदर होता है। श्रेष्ठ रमणियों के साथ विहार करने को लालायित रहता है। ऐसाव्यक्ति दीर्घ आयु वालास्वस्थसुखीमृदु एवं मधुभाषीविद्वानकामी तथा राजकार्य में दक्ष होता है।

 

दूसरे स्थान पर शुक्र हो तो जातक प्रियभाषी तथा बुद्धिमान होता है। स्त्री की कुंडली हो तो जातिका सर्वश्रेष्ठ सुंदरी पद प्राप्त करने कीअधिकारिणी होती है। जातक मिष्ठान्नभोगीलोकप्रियजौहरीकविदीर्घजीवीसाहसी  भाग्यवान होता है।

 

जातक की कुंडली में तीसरे भाव पर शुक्र हो तो वह स्त्री प्रेमी नहीं होता है। पुत्र लाभ होने पर भी संतुष्ट नहीं होता है। ऐसा व्यक्तिकृपणआलसीचित्रकारविद्वान तथा यात्रा करने का शौकीन होता है।

 

चतुर्थ भाव पर यदि शुक्र हो तो जातक उच्च पद प्राप्त करता है। इस व्यक्ति के अनेक मित्र होते हैं। घर सभी वस्तुओं से पूर्ण रहता है।ऐसा व्यक्ति दीर्घायुपरोपकारीआस्तिकव्यवहारकुशल  दक्ष होता है।

 

पांचवें भाव पर पड़ा हुआ शुक्र शत्रुनाशक होता है। जातक के अल्प परिश्रम से कार्य सफल होते हैं। ऐसा व्यक्ति कवि हृदयसुखीभोगीन्यायप्रियउदार  व्यवसायी होता है।

 

छठवांशुक्र जातक के नित नए शत्रु पैदा करता है। मित्रों द्वारा इसका आचरण नष्ट होता है और गलत कार्यों में धन व्यय कर लेता है।ऐसा व्यक्ति स्त्री सुखहीनदुराचारबहुमूत्र रोगीदुखीगुप्त रोगी तथा मितव्ययी होता है।

 

आठवें स्थान में शुक्र हो तो जातक वाहनादि का पूर्ण सुख प्राप्त करता है। वह दीर्घजीवी  कटुभाषी होता है। इसके ऊपर कर्जा चढ़ारहता है। ऐसा जातक रोगीक्रोधीचिड़चिड़ादुखीपर्यटनशील और पराई स्त्री पर धन व्यय करने वाला होता है।

 

यदि नौवें स्थान पर शुक्र हो तो जातक अत्यंत धनवान होता है। धर्मादि कार्यों में इसकी रुचि बहुत होती है। सगे भाइयों का सुख मिलताहै। ऐसा व्यक्ति आस्तिकगुणीप्रेमीराजप्रेमी तथा मौजी स्वभाव का होता है।

 

जिसके दशम भाव में शुक्र हो तो वह व्यक्ति लोभी  कृपण स्वभाव का होता है। इसे संतान सुख का अभावसा रहता है। ऐसा व्यक्तिविलासीधनवानविजयीहस्त कार्यों में रुचि लेने वाला एवं शक्की स्वभाव का होता है।

 

जिसकी जन्म कुंडली में ग्यारहवें स्थान पर शुक्र हो तो जातक प्रत्येक कार्य में लाभ प्राप्त करता है। सुंदरसुशीलकीर्तिमानसत्यप्रेमीगुणवानभाग्यवानधनवानवाहन सुखीऐश्वर्यवानलोकप्रियकामीजौहरी तथा पुत्र सुख भोगता हुआ ऐसा व्यक्ति जीवन मेंकीर्तिमान स्थापित करता है।

 

जिसके बारहवें भाव में शुक्र होतब जातक को द्रव्यादि की कमी नहीं रहती है। ऐसा व्यक्ति स्‍थूलपरस्त्रीरतआलसीगुणज्ञप्रेमीमितव्ययी तथा शत्रुनाशक होता है। एवं शक्की स्वभाव का होता है।

 

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