सकारात्मक जीवन के लिए टिप्स

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05 Jan
2020

आज के युग में औरतों को अपने घर और बाहर, दोनों जगह कई काम निपटाने होते हैं, जिसके कारण उनके ऊपर अत्यधिक तनाव का बोझ रहता है। औरतें एक बहन, मां और पत्नी के तौर पर अपने पारिवारिक सदस्यों की देखभाल करती हैं। जीवन के हर बदलते पड़ाव के साथ-साथ एक महिला को जीवन भर अपने स्वास्थ्य के बेहद सावधानी से ध्यान रखना चाहिये। उसे नियमित व्यायाम, स्वस्थ खान-पान और योग आदि भी करना चाहिये। कामकाज़ी महिलाओं का सारा वक़्त, घर और ऑफिस के बीच तालमेल बिठाने की जद्दोज़हत में निकल जाता है और सेहत पर ध्यान देना सबसे गैरज़रूरी बात हो जाती है।

घर की महिलाओं का भी फिट रहना उतना ही ज़रूरी जितना की पुरुषों का। लेकिन अकसर घर या ऑफिस के कामों में उलझी महिलाओं को अपनी फिटनेस पर ध्यान देने का मौका या फिर यूँ कहें समय नहीं मिलता। हमें इस बात को स्वीकार करना होगा की यदि वह स्वस्थ रहेगी तभी अपने परिवार को स्वस्थ रख सकेंगी।

इस बात में कोई संदेह नहीं की घर की बेटी सेहतमंद होगी तो आनेवाली पीढियां भी स्वस्थ होंगी। महिलाएं घर चलाती हैं, उनका फिट रहना सबसे ज्यादा ज़रूरी है, फिर चाहे वो हाउस वाइव्स हों या कामकाजी। हमने अपने घर में भी माँ और मेरी नानी को हर तरह की मुश्किलों का सामना करते देखा है। हमारा मानना है कि स्वस्थ और सुखी महिला ही एक खुशहाल परिवार बना सकती है। इसलिए हमें यह स्वीकार करना ही होगा की हम स्वस्थ तो पूरा परिवार स्वस्थ रहेगा। आज हम आपको स्वयं को स्वस्थ और सकारात्मक बनाए रखने के लिए उपयोगी टिप्स दे रहे हैं-

नये उम्मीदों का नया साल

आइये इस साल अपनी जिंदगी को नए सिरे से आगे बढ़ाने का संकल्प ले। कुछ ऐसा संकल्प, जो आपकी जिंदगी को एक दिशा दे, आपको उत्साह से भर दे और सेहतमंद जीवन जीने के लिए प्रेरित करे।

तन-मन को रखे स्वस्थ-

यह बात ध्यान रखे की अच्छी सेहत ही जीवन की कुंजी है। बीते वर्ष में आपकी सेहत जैसी भी रही हो, अपनी सेहत को बेहतर बनाने का संकल्प इस बार जरुर ले। खुद और परिवार के अन्य लोगो की हेल्थ के प्रति alert रहे। यह भी संकल्प ले। तन का ही नहीं, मन का भी ध्यान रखे। याद रखे की यदि आप शरीर से पूरी तरह फिट है, लेकिन अगर मन में शांति नहीं है, तो स्वस्थ तन को भी बीमार होते देर नहीं लगती। थोडा बहुत तनाव लेना ठीक है, पर ज्यादा तनाव लेने से अनिद्रा, तनाव, मोटापा, हृदय से सम्बन्धित बिमारियां होने लगती है। इसलिए आने वाले साल में स्वस्थ रहने का प्लान करे। नियमित रूप से व्यायाम करे।

मशीन के बजाय हाथ से घर का काम निपटाए। अच्छा खाना खाए, भरपूर नीद ले। ऐसे लोगो के संपर्क में रहे, जो सकारात्मक विचारधारा के हो। प्रेरक किताबे पढ़े। नियमित योग के साथ दिमागी कसरत वाले खेल खेले, ताकि आपका ध्यान फिजूल की बातो पर न लगे।

खुद से करे प्यार-

इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति 100% परफेक्ट नहीं है। उसमे कुछ न कुछ कमी तो होती ही है। याद रखिये रंग रूप, कद-काठी यह सब बाहरी चीजे है। असली व्यक्तित्व की रौशनी तभी नजर आती है, जब आपका मन, आपका स्वभाव भी चारो तरफ रौशनी फैलाये। इसलिए आपके अन्दर जो भी कमी है, उसे स्वीकार करे और उसे दूर करने का प्रयास करे। खुद से प्यार करना एक बहुत अच्छा कदम है।

रिश्तो में मीठापन रखे

यह बात कभी न भूले की हमारे रिश्ते रिटर्न बैक पालिसी की तरह होते है, जो मौका पड़ने पर आपके किये गये अच्छे व्यवहार के बदले आपका सहारा बनते है। आपके जीवन के खालीपन को भरते है और रोजाना के stress से आपको दूर रखते है। जिंदगी में खुश रहने के हमेशा दो स्तम्भ है- परिवार और दोस्त। इसलिए परिवार और दोस्तों का मजबूत होना बहुत जरुरी है। संकल्प ले अपने दोस्तों, परिवार के लोगो और पड़ोस से बेहतर रिश्ते करने की।

अगर रिश्तो में कड़वाहट या ग़लतफ़हमीयां है, तो उसे भी बातचीत से दूर करे। अपने परिवार के लिए समय निकाले, हो सके तो हर हफ्ते कही घुमने बाहर जाये। दोस्तों से जब भी मौका मिले फ़ोन से भी बात कर ले। office में सहकर्मियों के प्रति सहयोगात्मक रवैया बनाये रखे। पड़ोसियों की छोटी-छोटी बातो को नजरअंदाज करे। इससे रिश्तो में मिठास आएगी।

ना खोएं आत्मविश्वास

भले ही आपके पास कितनी ही डिग्रियां एवं योग्यताएं क्यों न हों, यदि आप में आत्मविश्वास नहीं है, तो सब बेकार है। आत्मविश्वास आपका जीवन ही नहीं बनाता, बल्कि आपके व्यक्तित्व को दोगुना बल भी देता है। आत्मविश्वास से किसी भी काम को करने और उस तक पहुंचने की एक साफ तस्वीर उभर के सामने आने लगती है। इससे कामयाबी के प्रति मन में भरोसा पैदा होता है। आत्मविश्वास एक ऐसा हथियार है, जो विपरीत परिस्थितियों में आपको कमजोर नहीं होने देता। यह विश्वास आपको सामर्थ्य देता है और सफलता की ओर अग्रसर करता है। इसलिए विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आत्मविश्वास को डगमगाने न दें।

अपना नजरिया बदलें

आपका चीजों को देखने का नजरिया आपके जीवन की गुणवत्ता निर्धारित करता है। जैसा हमारा नजरिया होता है, वैसी ही हमारी सोच बनती है। किसी विषय पर संकुचित एवं छोटी सोच से हमेशा निराशा ही हाथ्‍ा लगती  है। अगर आपको अपना नजरिया बदलने में दिक्कत हो रही है, तो परेशान न हों, क्योंकि मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि आपके शरीर को किसी नई चीज से सामंजस्य बैठाने में कम से कम 40 दिन लगते हैं। फिर देर किसी बात की, अभी से इस पर काम करना शुरू कर दीजिए।

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