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29 Apr
2017
April 29, 2017  comment(50)

विदेश में नौकरी और आजीविका के योग- विदेश में नौकरी एवं आजीविका की चाहत आज के युवाओं की पहली पसंद बन गई है. ऊँची डिग्रियां लेने के बाद ख्वाहिश यही होती है कि वह विदेश जाकर खूब कमाएं. लेकिन, विदेश जाने का अवसर…

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22 Apr
2017
April 22, 2017  comment(7)

कपूर के वैदिक करामाती उपाय शास्त्रों के अनुसार देवी-देवताओं के समक्ष कर्पूर जलाने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। अत: प्रतिदिन सुबह और शाम घर में संध्यावंदन के समय कर्पूर (कपूर) जरूर जलाएं। पितृदोष और कालसर्पदोष से मुक्ति हेतु: कपूर जलाने से…

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22 Apr
2017
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1. घर में सुख-शांति नहीं रहती तो जिस बर्तन से घर के सदस्य पानी पीते है, उसमें से एक लोटा पानी लेकर अपने घर के चारों कोने में और मकान के बीचों-बीच थोड़ा सा छिड़क दें। ये उपाय रात 12 से 3…

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15 Apr
2017
April 15, 2017  comment(6)

पितृ दोष कारण और निवारण कुण्डली के नवम भाव को भाग्य भाव कहा गया है। इसके साथ ही यह भाव पित्र या पितृ या पिता का भाव तथा पूर्वजों का भाव होने के कारण भी विशेष रुप से महत्वपूर्ण हो जाता है।…

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14 Apr
2017
April 14, 2017  comment(17)

सपने हर किसी को आते है। हर सपनों का मतलब और उनका फल होता है। सपने 2 तरह के होते है, एक वो जो हम सोने के बाद गहरी नींद में देखते है, दूसरा वो जो हम अपने सुनहरे भविष्य के लिए…

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14 Mar
2017
March 14, 2017  comment(5)

जब एक स्त्री और पुरूष वैवाहिक जीवन में प्रवेश करते हें तब उनके कुछ सपने और ख्वाब होते हैं। कुण्डली में मौजूद ग्रह स्थिति कभी कभी ऐसी चाल चल जाते हैं कि पारिवारिक जीवन की सुख शांति खो जाती है। पति पत्नी…

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09 Mar
2017
March 9, 2017  comment(3)

आजिविका के क्षेत्र में सफलता व उन्नति प्राप्त करने के लिये व्यक्ति में अनेक गुण होने चाहिए, सभी गुण एक ही व्यक्ति में पाये जाने संभव नहीं है. किसी के पास योग्यता है तो किसी व्यक्ति के पास अनुभव पर्याप्त मात्रा में…

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09 Mar
2017
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प्रेम विवाह करने वाले लडके व लडकियों को एक-दुसरे को समझने के अधिक अवसर प्राप्त होते है. इसके फलस्वरुप दोनों एक-दूसरे की रुचि, स्वभाव व पसन्द-नापसन्द को अधिक कुशलता से समझ पाते है. प्रेम विवाह करने वाले वर-वधू भावनाओ व स्नेह की…

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09 Mar
2017
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शनि की साढ़ेसाती शनि साढेसाती में शनि तीन राशियों पर गोचर करते है।तीन राशियों पर शनि के गोचर को साढेसाती के तीन चरण के नाम से भी जाना जाता है।अलग- अलग राशियों के लिये शनि के ये तीन चरण अलग-अलग फल देते…

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09 Mar
2017
 

धनिष्ठा का उतरार्ध, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उतरा भाद्रपद व रेवती इन पांच नक्षत्रों ( सैद्धान्तिक रुप से साढेचार) को पंचक कहते है. पंचक का अर्थ ही पांच का समूह है. सरल शब्दों में कहें तो कुम्भ व मीन में जब चन्द्रमा रहते…

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